नई दिल्ली, जुलाई 24 -- आज परिवार में समय देना और संवाद बनाए रखना सबसे बड़ी आवश्यकता है। माता-पिता को बच्चों की जिज्ञासाओं का समाधान करना होगा और इसके लिए उन्हें स्वयं भी निरंतर अपना ज्ञान बढ़ाना होगा। बच्चे केवल उपदेश से नहीं, बल्कि माता-पिता के आचरण का अनुकरण करके अधिक सीखते हैं। इसलिए माता-पिता को स्वयं अपने जीवन में आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए। उक्त बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शुक्रवार को राजधानी के अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में विश्वमांगल्य सभा की ओर से आयोजित 'युगानुकूल मातृत्व' विषयक प्रबोधन बैठक के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कही। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सृष्टि का सृजन, संवर्धन और पोषण मातृत्व के बिना संभव नहीं है। मातृत्व सृष्टि के संवर्धन, पोषण और निरंतरता का मूल आधार है। मनुष्य की सबसे बड़ी शक्...