नई दिल्ली, फरवरी 21 -- सियासत के मंच पर अक्सर सख्त और दृढ़ दिखने वाली पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे शनिवार को भावनाओं में डूब गईं। झालावाड़ के खोयरा गांव स्थित मुक्तेश्वर मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जब एक युवती ने उनके माता-पिता और भाई पर लिखी कविता पढ़ी, तो राजे की आंखें नम हो गईं। कुछ पल के लिए वे शब्दों को समेटती रहीं, फिर भरे गले से बोलीं-"मैं अपने जीवन में इन तीनों के योगदान को कभी नहीं भूल सकती। आज इनके बिना जीवन बहुत सूना लगता है।" यह मौका था झालावाड़-बारां से सांसद दुष्यंत सिंह की जनसंवाद पदयात्रा के तीसरे चरण के शुभारंभ का। मंच पर मौजूद जनसमूह के सामने अदिति शर्मा बकानी ने राजे के जीवन, उनके शासनकाल और परिवार की विरासत पर आधारित कविता सुनाई। कविता में उनके संघर्ष, निर्णय क्षमता और पारिवारिक मूल्यों का उल्लेख था। जै...
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