जौनपुर, अप्रैल 15 -- मड़ियाहूं, हिन्दुस्तान संवाद। परमहंस आश्रम सिऊरा में सोमवार की देर शाम आयोजित सत्संग में स्वामी परमहंस अड़गड़ानंद महाराज के शिष्य नारद महाराज ने कहा कि सद्गुरु से बड़ा कोई हितैषी संसार में नहीं है। किसी तत्वदर्शी महापुरुष की शरण में रहकर भजन करना ही मानव जीवन का सच्चा कल्याण है। भजन की शुरुआत गृहस्थ आश्रम से ही होती है। व्यक्ति अपने परिवार के साथ रहते हुए भी परमात्मा के लिए समय निकाल सकता है। यह वही परमात्मा है जिसने हमें अनमोल जीवन दिया है, इसलिए उसके स्मरण और भक्ति के लिए नियमित समय देना आवश्यक है। नारद महाराज ने बताया कि संसार में जितने भी ऋषि, महर्षि और महापुरुष हुए हैं, सभी गृहस्थ आश्रम से होकर ही निकले हैं। यह भी पढ़ें- रामायण,श्रीमद्भागवत एवं भागवत महापुराण सनातन धर्म के महत्वपूर्ण ग्रंथ उन्होंने श्रद्धालुओं से...
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