रामपुर, अक्टूबर 26 -- धान की कटाई शुरू होते ही पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए कृषि विभाग ने किसानों को जागरूक करना शुरू कर दिया है। खेत में पराली जलाने पर किसानों से पांच हजार से लेकर 30 हजार रुपये तक पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूल की जा सकती है। बार-बार पराली जलाने पर सरकारी अनुदान समेत अन्य सुविधाओं से भी वंचित किया जा सकता है। उप कृषि निदेशक राम किशन सिंह ने किसानों से पराली नहीं जलाने और फसल अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करने की अपील की है। उप कृषि निदेशक ने बताया कि एक टन धान की पराली जलाने से करीब 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलोग्राम फास्फोरस, 25 किलोग्राम पोटाश और 400 किलोग्राम जैविक कार्बन समेत कई पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। इससे खेतों की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। पराली जलने से कार्बन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्स...