गोरखपुर, दिसम्बर 5 -- गोरखपुर और बस्ती मंडल में धान की कटाई के बाद किसान खेतों में जो पराली जला रहे हैं, वह एक झटपट समाधान तो है, लेकिन कृषि वैज्ञानिक इसे मिट्टी के लिए बड़ी और लंबी बीमारी बता रहे हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की रिपोर्ट के अनुसार, पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता, उसकी जैविक जान और संरचना पर बहुत बुरा असर पड़ता है। एक टन पराली जलाने से मिट्टी के जरूरी पोषक तत्व जैसे 80% नाइट्रोजन, 60% सल्फर और 21% पोटाश बर्बाद हो जाते हैं। इससे किसान को अगली फसल के लिए ज्यादा खाद डालनी पड़ती है, जिससे खेती की लागत बढ़ जाती है। सबसे खतरनाक बात यह है कि आग लगने से मिट्टी का तापमान 400 से 500 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जिससे मिट्टी में मौजूद फायदेमंद बैक्टीरिया, केंचुए और फफूंद तुरंत मर जाते हैं, और जैविक सक्रियता 70% तक कम हो ...
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