एटा, अप्रैल 20 -- भगवान परशुराम जयंती के मौके पर शांति नगर में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी ओजपूर्ण, वीर रस एवं भक्ति रस से ओतप्रोत रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि प्रशांत उपाध्याय ने कहा कि अब कहां कोई नसीहत देखता है, बस इरादे और नियत देखता है। राकेश शम्स ने कहा कि मर्यादा में रहे थे तो वह राम हो गए, उनका ही नाम लेकर सारे काम हो गए। प्रशांत पाठक ने कहा कि कबिरा के जो गुरु बने दिया इंद्र को दान, विप्र सदा करते रहे जनमन का कल्याण। डॉ. सुधीर पालीवाल ने कहा कि स्नेह के हिंडोले झुलाती है मेरी मां, सारे जहां का प्यार लुटाती है मेरी मां। यह भी पढ़ें- परशुराम का जीवन अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देता डॉ. प्रशांत देव मिश्रा ने कहा- पाप और अन्याय का होगा काम तमाम, मानव जब बन जाएगा फिर से ...