परमार्थी व्यक्ति के संसर्ग में आने से मिलती है शांति : देवराहा शिवनाथ
आरा, मई 22 -- आरा, निज प्रतिनिधि। परम पूज्य त्रिकालदर्शी परम सिद्ध विदेह संतश्री देवराहा शिवनाथ दासजी महाराज के सान्निध्य में शुक्रवार को आरा के जज कोठी मोड़ के पास श्रीरामनवमी शोभायात्रा ट्रस्ट के महासचिव शंभू प्रसाद चौरसिया के आवास पर संकीर्तन का आयोजन हुआ।
संकीर्तन का आयोजन संकीर्तन के पूर्व शशंभू प्रसाद चौरसिया और श्रद्धालुओं की ओर से संत श्री देवराहा शिवनाथ दासजी महाराज की पूजा -अर्चना की गई। इसके बाद संतश्री ने श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि शास्त्रों में मानव जीवन को कर्म योनि कहा गया है। इसे भोग योनि नहीं कहा गया है। मानव के अतिरिक्त सभी जीव - अर्थात पशु पक्षी इत्यादि भोग योनि कहलाते हैं। वे न तो अपना उद्धार अथवा उत्थान कर सकते हैं और न ही दूसरों का।
स्वार्थी और परमार्थी का अंतर संसार में दो प्रकार के मनुष्य होते है...
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