मेरठ, मार्च 12 -- साकेत शिव मंदिर में चिन्मय मिशन संस्था के तत्वावधान में छह दिवसीय ज्ञान यज्ञ का शुभारम्भ किया गया। दीप प्रज्ज्वलित कर ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ करते हुए कथा व्यास स्वामी यतिश्वरानंद सरस्वती ने प्रवचन करते हुए कहा कि इस जगत का मूल आधार परमात्मा हैं। सम्पूर्ण जगत उसी परमात्मा से उत्पन्न होता है, उसी में स्थित रहता है और उसी की शक्ति से सभी प्राणी अपने अपने कर्म करते हैं। कहा कि जगत की उत्पत्ति से पहले ब्रह्म का उद्भव माना गया है। यह संसार नित्य परिवर्तनशील है, इसलिए इसे क्षर कहा गया है, जबकि आत्मा को नित्य और अक्षर बताया गया है। श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 15 पुरुषोत्तम योग पर कहा कि क्षर और अक्षर दोनों से परे जो परम तत्व है, वही पुरुषोत्तम ब्रह्म हैं और वही सम्पूर्ण सृष्टि का सर्वाधार हैं। परिवर्तन का नाम ही संसार है और यह एक ...