खगडि़या, मार्च 11 -- परबत्ता । एक प्रतिनिधि आजादी के पूर्व से ही परबत्ता के लोग बापू के चरखे के दीवाने थे। आज प्रखंड के विभिन्न गांवो में बापू के चरखे की धुन गुम हो गई है। वही विभाग के अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं। बापू के चरखे की धुन बंद होने के साथ-साथ सैकड़ों लोग काम के अभाव में बेरोजगार हो गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार आजादी के पूर्व वर्ष 1927 के दशक में प्रखंड के कन्हैयाचक, डुमरिया बुजुर्ग, खजरैठा, माधवपुर आदि गांवों में खादी भंडार की स्थापना की गई थी। स्थापना के बाद प्रखंड के दर्जनों गांवों की महिला व पुरुष गांधी के चरखे की संगीत की धुन के दीवाने हो गए थे। गांव की हजारों महिलाओं को रोटी व रोजगार के अवसर मिल गए थे। प्रखंड के विभिन्न पंचायतों के लोग खादी ग्रामोद्योग के दीवाने हो गए थे। यही कारण था कि स्वतंत्रता आंदोलन में पुराने जि...
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