पन्नी की झोंपड़ी में जिंदगी से जंग, दो जून की रोटी का इंतजार
फतेहपुर, सितम्बर 9 -- अमौली। रात भर आसमान से बरसता पानी उस पर टपकती पन्नी की छत ऐसे में पन्नी की झोंपड़ी के अंदर आधी पानी में डूबी चारपाई पर एक पिता अपनी दस साल की मासूम पुत्री को सीने से लगाए पानी से बचाते हुए रात आंखों में ही गुजारने को मजबूर है। न छत बचाने की उसके पास कुछ व्यवस्था थी न ही बारिश में टपकती पन्नी की छत से बेटी को बचाने की जुगाड़, मामला क्षेत्र के गोहरारी मजरे खदरा गांव का है। जो दोआबा में दी जाने वाली सरकारी योजनाओं की लंबी फेहरिस्त को आईना दिखा रहा है। पात्रों को सरकारी योजनाओं के दिए जाने वाले लाभों के दावों को गोहरारी गांव में बनी एक पन्नी की झोपड़ी आईना दिखा रही है। जो सरकारी तंत्र की पहुंच और संवेदनशीलता पर भी बड़ा सवाल खड़े कर रही है। यहां पर राकेश सविता ग्राम समाज की भूमि पर पन्नी की झोंपड़ी बनाकर दस साल की पुत्री गुड़िया...
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