नई दिल्ली, अक्टूबर 28 -- केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महिला की तलाक की अर्जी को मंजूर करते हुए कहा है कि पति द्वारा लगातार शक करना, पत्नी की हर गतिविधि पर नजर रखना और यहां तक कि नौकरी छोड़ने के लिए भी मजबूर कर देना, क्रूरता है। महिला फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील लेकर हाईकोर्ट पहुंची थी। जस्टिस देवन रामचंद्रन और जस्टिस एमबी स्नेहलता की पीठ ने कहा कि पति का ऐसा आचरण तलाक अधिनियम, 1869 की धारा 10(1)(x) के तहत गंभीर मानसिक क्रूरता के समान है। बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक दंपति की शादी 2013 में हुई थी और उनकी एक बेटी भी है। पत्नी ने अदालत को बताया कि शादी के शुरुआती दिनों से ही उसका पति उस पर शक करने लगा। महिला ने बताया कि पति ने उसकी हर एक गतिविधि को नियंत्रित करके लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। उसने आगे यह ...
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