रांची, मई 22 -- रांची, संवाददाता। पत्नी की कथित बांझपन की जानकारी छिपाकर शादी करने के आरोप में दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा नंबर-1 की अदालत ने शुक्रवार को खारिज कर दी। कोर्ट ने निचली अदालत के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें शिकायतकर्ता की शिकायतवाद को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में खारिज कर दिया गया था। मामले में बिरेंद्र मोहन मिश्रा ने आरोप लगाया था कि 2022 में हुई शादी के बाद उन्हें पता चला कि पत्नी प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में असमर्थ हैं और यह विवाह से पहले छिपाया गया। शिकायतकर्ता ने इसे धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश बताया था। यह भी पढ़ें- पति को नपुंसक बताना मानहानि नहीं, पत्नी को हाईकोर्ट से राहत अदालत ने कहा कि किसी महिला की प्राकृतिक या चिकित्सीय बांझपन को स्वतः आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने...