रांची, सितम्बर 22 -- पत्नी की एक इच्छा ने पति को अदालत तक पहुंचा दिया। पत्नी चाहती थी कि पति अपने वृद्ध माता-पिता को छोड़कर पटना आए और उसके मायके में घरजमाई बनकर रहे। पति ने इसे मानसिक क्रूरता बताया और विवाह खत्म करने के लिए तलाक की अर्जी दाखिल कर दी। मामला फैमिली कोर्ट से होता हुआ झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा। लेकिन हाईकोर्ट ने कहा-सिर्फ पत्नी का पति को घरजमाई बनाने की इच्छा जताना वैवाहिक क्रूरता नहीं है। अदालत ने पति की तलाक की अपील खारिज कर दी। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने राहुल चौबे की अपील पर यह फैसला सुनाया। पति-पत्नी की शादी 21 नवंबर 2008 को पटना में हुई थी। दोनों की एक बेटी भी है। शादी के शुरुआती दिनों में दांपत्य जीवन सामान्य रहा, लेकिन बाद में पत्नी का बार-बार पटना स्थित मायके जाना पति को नागवार गुजरने...