नई दिल्ली, अगस्त 2 -- Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने बीते शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। इसमें देश की सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यदि पत्नी पर किसी दूसरे पुरुष के साथ शारीरिक संबंध बनाने के आरोप लगा है और प्रथम दृष्टया में सच प्रतीत होता है तो उसे अंतरिम भरण पोषण (मेंटेनेंस) नहीं दिया जा सकता है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि सीआरपीसी की धारा 125(4) के तहत पति द्वारा दायर याचिका के लंबित रहने के दौरान पत्नी को अंतरिम भरण-पोषण देने से मना नहीं किया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने पति की याचिका को स्वीकार कर लिया। निचली अदालत और राजस्थान हाईकोर्ट ने पति की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने अंतरिम भरण-पोषण देने से पहले एडल्ट्री के आर...