पत्तों के सहारे चलती है जिंदगी : मधुपुर में मारवाड़ी दुकानदार दे रहे आदिवासी महिलाओं को आसरा
देवघर, जून 22 -- जंगल का पत्ता ही हमारा सोना है। मधुपुर के डालमिया कूप चौक और गांधी चौक के पास बैठी आदिवासी महिलाओं की यह बात उनके जीवन का सच बयां करती है। यहां वर्षों से मारवाड़ी समाज स्थानीय आदिवासियों को अपने घर-दुकान के चबूतरे और बरामदे पर जगह दे रहा है, जहां वे दोना-पत्तल, दातुन और अन्य वन उत्पाद बेचकर अपना घर चलाती हैं।
आदिवासी महिलाओं की मेहनत मधुपुर अनुमंडल क्षेत्र के जगदीशपुर, बुढ़ई, जाभागुड़ी, पत्थरजोर, जीतपुर, चेचाली, महुआडाबर, पिपरासोल, सरपत्ता समेत दर्जनों गांवों से आदिवासी समुदाय की महिलाएं सुबह-सुबह मधुपुर शहर पहुंचती हैं। सिर पर गठरी में साल, पलाश और सागवान के पत्तों से बने दोना-पत्तल, दातुन, महुआ और अन्य जंगली उत्पाद लेकर आती हैं। स्थानीय मारवाड़ी व्यवसायियों ने इन्हें अपने प्रतिष्ठानों के आगे चबूतरे और बरामदे पर बैठने क...
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