नई दिल्ली, सितम्बर 2 -- रिपोर्ट- निखिल पाठक दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने एक मामले में फैसला देते हुए कहा कि पति की आर्थिक क्षमता से ज्यादा गुजारा भत्ता देने का आदेश नहीं दिया जा सकता है। अदालत ने माना कि पत्नी को दिया गया भत्ता उसकी बुनियादी जरूरतों के लिए कम हो सकता है, लेकिन गुजारा भत्ता तय करते समय पति की वास्तविक या अनुमानित आय को ध्यान में रखना भी जरूरी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की कोर्ट ने यह टिप्पणी एक महिला की अपील खारिज करते हुए की। इस महिला ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत मजिस्ट्रेट की अदालत द्वारा तय किए गए 1840 रुपए प्रतिमाह के अंतरिम गुजारा भत्ते की राशि को बढ़ाने की मांग की थी। महिला का कहना था कि दिल्ली जैसे शहर में इतनी कम राशि में गुजारा करना संभव नहीं है।कोर्ट ने माना तय रकम जरूरत के हिसाब से बेहद कम इस मामल...