बिलासपुर, मार्च 12 -- छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने गुरुवार को भरण-पोषण से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि यदि पत्नी बिना किसी ठोस कारण के पति और बच्चों को छोड़कर दूसरे पुरुष के साथ रहती है, तो उसे गुजारा भत्ता मिलने का अधिकार नहीं है। इसके साथ ही उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की एकल बेंच ने निचली अदालत के आदेश को सही ठहराते हुए महिला की याचिका खारिज कर दी। मामले में भिलाई की रहने वाली महिला ने अपने पति के खिलाफ भरण-पोषण की मांग की थी। महिला का कहना था कि वह पति की अनुमति से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दिल्ली में कोचिंग लेने गई थी। उसने दावा किया कि पति का व्यवसाय अच्छा है और उसकी मासिक आय लगभग तीन लाख रुपए है, इसलिए उसे एक लाख रुपए मासिक गुजारा भत्ता दिया जाना चाहिए। यह भी पढ़ें- भीषण गर्मी के बीच छत्...