विधि संवाददाता, अप्रैल 9 -- UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी पत्नी और उसके रिश्तेदारों को उसके पति की आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी सिर्फ इसलिए नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि उन्होंने वैवाहिक विवाद को लेकर उसके खिलाफ केस दर्ज कराए। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ केस दर्ज कराने से, भले ही वे झूठे होने का आरोप हों, आईपीसी की धारा 306 के तहत अपराध साबित करने के लिए अपराधिक इरादा साबित करना जरूरी है। न्यायमूर्ति समीर जैन की पीठ ने इस तरह पत्नी और उसके परिवार वालों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह साबित हो कि उनका मृतक (पति) को आत्महत्या के लिए उकसाने का कोई आपराधिक इरादा था। कोर्ट ने कहा, कि इस अदालत की राय में, सिर्फ केस दर्ज कराने से भले ही वे झूठे केस हों, यह नहीं कहा जा ...