नई दिल्ली, जुलाई 28 -- बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि बराबरी का दावा चुनिंदा तरीके से नहीं किया जा सकता और यदि पति एवं पत्नी दोनों कमाते हैं तो घर चलाने और बच्चे की शिक्षा का खर्च दोनों को मिलकर उठाना चाहिए। कोर्ट ने यह टिप्पणी अलग रह रही पत्नी और नाबालिग बेटे के लिए तय मासिक भरण-पोषण राशि कम करते हुए की। न्यायमूर्ति एम. एम. साथये की एकल पीठ ने पिछले सप्ताह दिए आदेश में पारिवारिक अदालत के जनवरी 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया। इसमें पति को पत्नी और बेटे के लिए प्रति माह 50,000 रुपये भरण-पोषण खर्च देने का निर्देश दिया था। उच्च न्यायालय ने यह राशि घटाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दी。

अदालत का तर्क अदालत ने कहा कि पति मुंबई में मकान की ईएमआई चुका रहा है, जिसमें पत्नी और बेटा रह रहे हैं। दूसरे मकान की ईएमआई भी वही भर रहा है। वह स्वयं बिहार में रह...