प्रयागराज, मई 4 -- Allahabad Highcourt Order: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पति-पत्नी के साथ रहते हुए जन्मे बच्चे को पति की ही वैध संतान माना जाएगा। ऐसे बच्चे के पितृत्व निर्धारण के लिए डीएनए टेस्ट का आदेश तभी दिया जा सकता है जब यह निर्विवाद रूप से साबित कर दिया जाए कि उस अवधि में (बच्चे के गर्भ धारण के समय) पति-पत्नी एक दूसरे के संपर्क में कभी नहीं आए। इस निष्कर्ष के साथ हाईकोर्ट ने परिवार न्यायलय आगरा के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें एक बच्चे के पितृत्व निर्धारण के लिए डीएनए टेस्ट कराने की मांग को खारिज कर दिया गया था। मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति नंद प्रभा शुक्ला ने कहा कि विवाह के दौरान जन्मे बच्चे को कानूनन वैध माना जाता है और इस धारणा को केवल ठोस साक्ष्य से ही खंडित किया जा सकता है। मामले के अनुसार ...