नई दिल्ली, मार्च 26 -- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि पति-‑पत्नी के बीच सहमति या असहमति से जुड़े शारीरिक संबंधों को आईपीसी की धारा-377 के तहत 'अप्राकृतिक अपराध' नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह टिप्पणी एक ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी द्वारा दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न और दहेज प्रताड़ना का मुकदमा निरस्त करने की मांग की थी। जस्टिस मिलिंद फड़के ने 25 मार्च को दिए आदेश में स्पष्ट किया कि आईपीसी की धारा 377 जिसे पारंपरिक रूप से 'अप्राकृतिक कृत्य' से जोड़कर देखा गया है, पति-‑पत्नी के वैवाहिक संबंधों पर लागू नहीं होती। उन्होंने कहा कि वैवाहिक संबंधों के दायरे में आने वाले आरोपों पर धारा-377 के तहत अभियोजन नहीं चलाया जा सकता।यह मामला एक महिला की शिकायत से जुड़ा है, जिसमें उसने अपन...
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