मुंबई, जुलाई 3 -- महाराष्ट्र के ठाणे की एक कोर्ट ने साल 2018 में 21 वर्षीय पत्नी को दहेज के लिए प्रताड़ित करने और उसे आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में उसके पति और सास-ससुर को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि ''वैवाहिक जीवन में होने वाली सामान्य खटपट को क्रूरता नहीं माना जा सकता।'' अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पंकज ए. पाटकी ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों द्वारा की गई क्रूरता की किसी विशिष्ट घटना या उनके कृत्यों और महिला द्वारा आत्महत्या किए जाने के बीच प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करने में विफल रहा। जान गंवाने वाली महिला निशा पेशे से नर्स थी और उसने दिसंबर 2016 में अनिल रंगनाथ गायकवाड़ (31) से विवाह किया था। विवाह के बाद वह ठाणे में पति तथा सास सोजर गायकवाड़ (56) और ससुर रंगनाथ गायकवाड़ (71) के साथ रहती थी। निशा ने 14 मई, 2018 को अ...