नई दिल्ली, जून 5 -- सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान वैवाहिक जीवन में होने वाले कलह को लेकर कुछ अहम टिप्पणियां की हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला की आत्महत्या के मामले में उसके पति को बरी करते हुए कहा है कि मतभेद और अनबन शादीशुदा जिंदगी का एक हिस्सा हैं और इसकी वजह से कुछ समय के लिए बातचीत बंद होना भी सामान्य है। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि महज कुछ दिनों तक पत्नी से बात न करने के आधार पर किसी पति को 'क्रूरता' का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। सुनवाई के दौरान जस्टिस जे के माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चांदुरकर की पीठ ने निचली अदालत और मद्रास हाईकोर्ट के फैसलों को पलट दिया। इससे पहले HC ने पति को IPC की धारा 498A के तहत दोषी माना था और तीन साल जेल की सजा सुनाई थी। मामला तब शुरू हुआ जब शख्स की पत्नी ने अपने मायके में फांसी लग...