रांची, सितम्बर 5 -- रांची। सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों को आज बहुआयामी भूमिकाएं निभानी पड़ रहीं हैं। कभी चुनाव ड्यूटी, तो कभी सरकारी सर्वे, कभी विभागीय पोर्टल पर आंकड़े अपलोड करना, तो कभी मिड-डे मील का हिसाब-किताब। पढ़ाई के बीच शिक्षकों को लगातार ऐसे काम निपटाने पड़ रहे हैं, जिनका सीधे तौर पर शिक्षण कार्य से कोई संबंध नहीं है। रांची जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अध्यापन और गैर-शैक्षणिक कार्यों के बीच संतुलन बनाने की बनी हुई है। कागजी और ऑनलाइन रिपोर्टिंग का दबाव यह भी पढ़ें- शिक्षक दिवस:: झारखंड के 28% सरकारी स्कूल सिर्फ एक मास्टर के भरोसेशिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी शिक्षकों का कहना है कि स्कूल में उनकी पहली जिम्मेदारी बच्चों को पढ़ाना है। परंतु नामांकन, छात्रवृत्ति, डीबीटी डेटा, इक...