पढ़ाई का दबाव नहीं झेल पाते विद्यार्थी
नई दिल्ली, अक्टूबर 2 -- शिक्षा का उद्देश्य अब सिर्फ ज्ञान प्राप्त करना नहीं रह गया है। अच्छे अंक, प्रवेश परीक्षा, डिग्री, नौकरी और करियर की होड़ में यह लगातार बदलता जा रहा है। इसका सबसे गंभीर असर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इसी कारण उनमें आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ रही है। आईआईटी जैसे उच्च प्रतिष्ठित संस्थानों में तो यह समस्या कहीं अधिक गहरी है। आंकड़े इस संकट की गंभीरता बताते हैं। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, एनसीआरबी की 2022 की रिपोर्ट में 13,044 छात्रों की आत्महत्याएं दर्ज हुईं, जो उस वर्ष देश में हुई कुल आत्महत्याओं का 7.6 प्रतिशत थी। इसी समस्या को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राष्ट्रीय कार्य-बल बनाया गया। फरवरी 2026 तक उसके सर्वे में 12.88 लाख से अधिक छात्रों व 16,750 उच्च शिक्षण संस्थानों ने भाग लिया। कार्य-बल ...
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