पड़हा व्यवस्था हमारी सांस्कृतिक पहचान : डॉ दिवाकर मिंज
रांची, जून 3 -- बेड़ो, प्रतिनिधि। बेड़ो से दो किलोमीटर दूर बारीडीह जतरा बागीचा में बुधवार को 37वां पड़हा जतरा समारोह केंद्रीय पड़हा संचालन ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पारंपरिक वेशभूषा, लकड़ी से बने घोड़ा, हाथी और टेंगरा छाता जैसे प्रतीक चिन्हों की पूजा के बाद खोड़हा नृत्य दल के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो सभा स्थल पहुंचकर जनसभा में तब्दील हो गई। मुख्य अतिथि शिक्षाविद् डॉ. दिवाकर मिंज ने कहा कि आदिवासी समाज की तीन स्तरीय संरचना में पड़हा व्यवस्था का प्रशासनिक और न्यायिक महत्व है। यह व्यवस्था कई गांवों को जोड़कर सामाजिक समरसता बनाए रखती है। उन्होंने कहा कि पड़हा जतरा केवल मेला नहीं, बल्कि सामाजिक संगठन और विचार-विमर्श का मंच है, जिसे बचाना आवश्यक है। यह भी पढ़ें- पड़हा जतरा हमारी और सामाजिक सांस्कृतिक धरोहर ...
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