रांची, जून 2 -- बेड़ो, प्रतिनिधि। बेड़ो प्रखंड के बारीडीह गांव स्थित पड़हा जतरा मैदान में तीन दिवसीय पड़हा जतरा के दूसरे दिन कार्यशाला और विचार गोष्ठी आयोजित हुई। इसमें पारंपरिक पड़हा व्यवस्था को मजबूत करने और उसके महत्व पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में विभिन्न गांवों के पड़हा राजा, दीवान, कोटवार और ग्रामीण शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि पड़हा व्यवस्था सदियों पुरानी स्वशासन प्रणाली है, जो सामाजिक न्याय, भाईचारा और आदिवासी पहचान को मजबूत करती है। संरक्षक डॉ दिवाकर मिंज ने कहा कि पड़हा व्यवस्था का ऐतिहासिक महत्व है और यह आज भी ग्रामीण स्तर पर विवाद निपटारे में उपयोगी है। भौआ उरांव ने जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई। यह भी पढ़ें- जतरा के लिए 20 शौचालय और पेयजल की व्यवस्था की कार्यकारी अध्यक्ष जुगेश उरांव ने कहा कि यह व्यवस्था सामाजिक समरसता का आधार...