पटना, मार्च 13 -- कंकड़बाग कांटी फैक्ट्री रोड में 'सिंह फ्राइड चिकेन' की यूनिट तीन दिन बाद शुक्रवार को फिर से खुल गई। यहां ग्राहकों को बिरयानी, तंदूर, चाइनीज आदि पकवान एलपीजी गैस पर नहीं बल्कि कोयले के चूल्हे पर तैयार कर परोसा जा रहा है। पटना में इस तरह की सैकड़ों छोटी-बड़ी दुकानें हैं जो एलपीजी के विकल्प के रूप में कोयला, लकड़ी आदि का उपयोग करने लगे हैं। पटना के कारोबारी एलपीजी के अभाव में फिर से वैकल्पिक ईंधन को अपनाने लगे हैं। ड्रम और बड़े कनश्तर से बन रहे चूल्हे : मिट्टी और लोहे के चूल्हों और भट्ठी बनाने के लिए ड्राम और बड़े कनश्तर का उपयोग किया जा रहा है। कंकड़बाग पीसी कॉलोनी से कोयले की भट्ठी बनवाने वाले पनीर और घी करोबारी राजीव सिंह ने बताया कि उन्होंने लोहे की भट्ठी के लिए 33 सौ रुपये चुकाया है। वहीं, एक अन्य कारोबारी सुमन यादव बताते हैं...
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