पक्की गायिकी के मूल स्वरूप का श्रोताओं ने लिया आनंद
वाराणसी, जून 23 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। कानपुर के पिता-पुत्र की जोड़ी पं.विनोद कुमार द्विवेदी एवं आयुष द्विवेदी ने काशी में ध्रुपद गायन के रंग जमाया। पद्मभूषण पं.राजन मिश्र स्मृति संगीत समारोह की दूसरी और अंतिम संध्या में उन्होंने अपनी भावपूर्ण गायिकी का जादू बिखेरा। अनुनाद इंडिया फाउंडेशन की ओर से सोमवार को भेलूपुर स्थित होटल डायमंड में हुए संगीत सत्र में पिता-पुत्र ने पक्की गायिकी के मूल स्वरूप से श्रोताओं को परिचित कराया। उन्होंने राग जयजयवंती में चौताल 13 मात्रा में निबद्ध बंदिश 'राजा राम पुरुषोत्तम...।' इसके उपरांत इसी राग में सूलताल 10 मात्रा में निबद्ध रचना 'जग जननी भवानी' के गायन से विभोर किया। उन्होंने इसके बाद श्रोताओं की फरमाइश पर कुछ पारंपरिक बंदिशें भी सुनाईं। समापन राग वसंत में नौ मात्रा में निबद्ध रचना 'शिव जटा में गंग...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.