जमशेदपुर, सितम्बर 16 -- नक्सलियों के संगठन में प्रेम करना पाप माना जाता था। यदि संगठन में रहते किसी महिला और पुरुष नक्सली के बीच प्रेम हो गया और दोनों ने साथ जीवन बिताने का फैसला किया तो उन्हें इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ती थी। आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे झारखंड, बंगाल और ओडिशा के नक्सलियों के अनुसार, संगठन में विवाह का तरीका बिल्कुल अलग था। न निकाह होता था, न फेरे लेने होते थे। अंतिम सांस तक संगठन के लिए साथ लड़ने की शपथ और एक-दूसरे का हाथ थामना ही विवाह की रस्म मानी जाती थी। नक्सलियों ने पुलिस को बताया कि संगठन में किसी महिला-पुरुष के बीच प्रेम संबंध की जानकारी मिलने के बाद बड़े नेता पूछताछ करते थे। यदि दोनों शादी के लिए तैयार होते थे तो उनके सामने सबसे बड़ी शर्त होती थी कि भविष्य में बच्चे पैदा नहीं होंगे। संगठन के लिए बच्चे पैदा कर...