न कोडिंग की अंधी दौड़, न बड़े कॉलेज का टैग... फिर कैसे 3.2 लाख से 40 लाख पर पहुंचे सौरभ?
नई दिल्ली, सितम्बर 25 -- भारत में हर साल लाखों युवा इंजीनियरिंग की डिग्री लेते हैं। इनमें से ज्यादातर टियर-3 कॉलेजों से होते हैं, जहां कैंपस प्लेसमेंट के नाम पर अक्सर चंद कंपनियां ही आती हैं। ऐसे में सर्विस बेस्ड या मास रिक्रूटर कंपनियों में 3 से 4 लाख रुपये का पैकेज मिलना एक आम बात है। लेकिन क्या इसी पैकेज पर जिंदगी बितानी है या अपनी मेहनत से आसमान छूना है, यह पूरी तरह से इंसान की अपनी लगन पर निर्भर करता है। आज इंटरनेट पर एक ऐसी ही कहानी वायरल हो रही है, जिसने हजारों युवाओं के अंदर एक नई उम्मीद जगा दी है। यह कहानी सौरभ मिश्रा की है, जिन्होंने अपने करियर में वो छलांग लगाई है जिसके बारे में लोग सिर्फ सपने देखते हैं।कोडिंग की भीड़ से किया खुद को अलग सौरभ मिश्रा ने एक टियर-3 सरकारी कॉलेज, यूपीटीसी से अपनी बी.टेक की पढ़ाई पूरी की। कॉलेज के दि...
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