नई दिल्ली, फरवरी 14 -- मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि न्याय तक पहुंच केवल कानूनी रूप से सक्षम लोगों के लिए सुरक्षित नहीं रह सकती, बल्कि इसे हाशिए पर मौजूद लोगों के लिए वास्तविक परिणामों में परिवर्तित होना चाहिए। यहां राष्ट्रमंडल न्यायिक शिक्षाविदों (सीजेई) की 11वीं द्विवार्षिक बैठक को संबोधित करते हुए, न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि न्यायिक नेतृत्व को प्रशासनिक अधिकार या संस्थागत पदानुक्रम तक सीमित नहीं किया जा सकता है और इसे एक बौद्धिक एवं नैतिक अभिविन्यास के रूप में समझा जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्याय तक पहुंच एक अमूर्त आदर्श बनकर नहीं रह सकती, जो केवल कानूनी रूप से सशक्त लोगों के लिए आरक्षित हो। इसे न्याय की कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति, हाशिए पर पड़े नागरिक के लिए वास्तविक परिणामों में तब्दील होना चाहिए, जि...
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