अलीगढ़, मार्च 25 -- अलीगढ़, कार्यालय संवाददाता। नवरात्रि में नौ देवियों की पूजा का विशेष महत्व होता है। देवी के हर रूप के साथ अलग प्रभाव जुड़ा हुआ है। मनुष्य का पूरा जीवन चक्र इन नौ रूपों के आधार पर ही चलता है। पहली देवी मानव मन पर अधिपत्य रखती है और वह नवजात शिशु, अबोध मन की तरह निर्मल है। वहीं अंतिम देवी सिद्धिदात्री का स्वरूप देह त्याग चुकी आत्मा का है, जिसने सिद्धि प्राप्त कर खुद को परमात्मा में विलीन कर लिया। ज्योतिषाचार्य पं. ह्रदय रंजन शर्मा ने बताया कि मानव मन पर अधिपत्य रखती पहली दुर्गा चंद्र स्वरूपा देवी शैलपुत्री शाश्वत जीवन में उस नवजात शिशु स्वरूप है, जो अबोध है, निष्पाप है, जिसका मन निर्मल है। ब्रह्मचारिणी तामसिक इंद्रियों पर विजय प्राप्त करती उस बच्चे की तरह हैं, जो बड़ा हो रहा है, विद्यार्थी है और जिसका जीवन ही ज्ञान स्वरूप...