मिर्जापुर, जून 7 -- लालगंज। आदिवासी बहुल और कभी नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहे लालगंज क्षेत्र की पहचान अब डेयरी उद्योग के लिए बन गई है। एमबीए की डिग्री लेने के बाद निजी क्षेत्र की नौकरी छोड़कर गांव लौटे एक युवा ने डेयरी व्यवसाय का ऐसा मॉडल विकसित किया कि खुद की आमदनी बढ़ने के साथ ही लगभग तीन हजार अन्य लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मुहैया कराने में सफल रहा। लालगंज में संग्रह किया गया दूध मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में भेजा जाता है। तहसील क्षेत्र के सोठिया गांव निवासी अचलेंद्र मौर्य ने उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद मदर डेयरी की नौकरी छोड़ दी। यह भी पढ़ें- नियमित सिंचाई सुविधा से नकदी फसलों का उत्पादन बढ़ा गांव लौटकर उन्होंने किसानों और पशुपालकों को डेयरी व्यवसाय से जोड़ने का अभियान शुरू किया। वर्तमान में क्षेत्र के 52...