मुजफ्फरपुर, फरवरी 10 -- मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। विश्वविद्यालय सेवा आयोग से चयनित सहायक प्राध्यापकों की जांच में नया मामला सामने आया है। कई सहायक प्रध्यापकों ने नौकरी के बाद पीएचडी की है, जबकि आयोग के विज्ञापन में कहा गया था कि सहायक प्रध्यापक के आवेदन के समय अभ्यर्थी को पीएचडी कर लेनी है। इस गड़बड़ी के बाद भी इन सहायक प्राध्यापकों को अनुभव पत्र का लाभ दिया गया। रजिस्ट्रार प्रो. समीर कुमार शर्मा ने कहा कि जांच की प्रक्रिया अभी चल रही है। इसमें जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनपर विधिवत कार्रवाई की जाएगी। जांच में जिन सहायक प्राध्यापकों की गड़बड़ी पकड़ी गई है, उन्होंने इवनिंग कॉलेज से अपना अनुभव प्रमाणपत्र दिया था। बीआरएबीयू में अभी वर्ष 2020 से 2025 तक विवि सेवा आयोग से नियुक्त सहायक प्राध्यापकों की जांच की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि विव...
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