नई दिल्ली, जून 30 -- नोएडा की एक फैक्ट्री में काम करने वाला एक कर्मचारी मई 2012 में एक दिन बिना किसी को बताए काम से चला गया। उसने यह किसी को नहीं बताया कि वह कहां जा रहा है, क्यों जा रहा है या कब वापस आएगा। उसने कोई चिट्ठी नहीं भेजी। उसने छुट्टी के लिए कोई अर्जी नहीं दी। नौकरी छोड़ने के बाद उसने फोन भी नहीं उठाया। फिर भी अगले दस सालों में उसने दो अलग-अलग अदालतों को यह यकीन दिला दिया कि गलती उसके मालिक की थी और उसे कोर्ट से नौकरी पर वापस रखने का आदेश, बकाया वेतन और उससे जुड़े कई फायदे मिले। हालांकि अब देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट को इस पूरे फैसले को पलटना पड़ा।क्या था मामला टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक अर्जुन गुप्ता अगस्त 2006 से फव्वारे वगैरह बनाने और डिजाइन करने वाली एक प्राइवेट इंजीनियरिंग कंपनी में मोल्डर के तौर पर काम कर...