गोरखपुर, जून 25 -- गोरखपुर, कार्यालय संवाददाता। एम्स का नेत्र रोग विभाग डायबिटीज से होने वाली आंखों की गंभीर बीमारी डायबिटिक रेटिनोपैथी की समय से पूर्व पहचान के लिए साफ्टवेयर विकसित करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए एम्स नेत्र रोग वाले 50 हजार डायबिटिक मरीजों का डेटाबेस तैयार कर रहा है। इसी डेटा बेस के आधार पर बीमारी की पहचान के लिए विजुअल प्रोग्नोसिस सिस्टम के तहत सॉफ्टवेयर विकसित किया जाएगा। इससे बीमारी की पहचान शुरुआती समय में हो जाएगी ।

उपचार प्रक्रिया एम्स की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अलका त्रिपाठी ने बताया कि डायबिटिक रेटिनोपैथी शुगर मरीजों में निकट दृष्टि दोष और अंधेपन का एक सबसे बड़ा कारण है। लंबे समय तक अनियंत्रित शुगर की वजह से आंख की रेटिना की रक्त वाहिकाएं प्रभावित होने लगती हैं, जिससे देखने की क्षमता धीरे-धीरे कम हो जाती है। स...