नई दिल्ली, मार्च 9 -- नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री पद से जल्दी ही विदा हो जाएंगे। उन्होंने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया है। उच्च सदन में उनका कार्यकाल अप्रैल में शुरू होना है। तब तक वह पद पर रह सकते हैं, लेकिन फिर उनका विकल्प तलाशना ही होगा। नीतीश कुमार के पटना से एग्जिट को भाजपा के लिए राज्य में अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। नीतीश कुमार 2005 से ही सत्ता की धुरी रहे हैं। छोटे से अंतराल के लिए जेडीयू से ही जीतनराम मांझी सीएम बने थे। उन्हें छोड़ दें तो करीब 20 साल नीतीश कुमार ही सत्ता में रहे। ऐसे में अब उनका दिल्ली जाना भाजपा के लिए अवसर तो है, लेकिन यह मौका चुनौतियों के साथ आया है। पहली चुनौती यही है कि भाजपा की तमाम कोशिशों के बाद भी पिछड़े और दलितों का एक बड़ा वर्ग उसे अगड़ों की ही पार्टी मानता है। बिहार के हालात यूपी ज...