नई दिल्ली, मार्च 7 -- वह सन् 2000 का मार्च महीना था। नीतीश कुमार अपनी सात दिन पुरानी सरकार के सिलसिले में विधानसभा से मुखातिब थे। उन्हें बहुमत साबित करने के लिए कम से कम 12 विधायकों की आवश्यकता थी। आज की रीति-नीति से तो 20 निर्दलीय और 23 कांग्रेसियों की मौजूदगी के चलते यह कोई मुश्किल काम न था, लेकिन वे दिन अलग थे। विधानसभा में लालू यादव की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनता दल के सर्वाधिक 124 सदस्य थे, जबकि नीतीश की समता पार्टी को महज 34 सीटें मिली थीं। उन्हें भाजपा और अन्य सहयोगियों सहित कुलजमा 151 सदस्यों का साथ हासिल था। इसी 'आधार' पर राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था। उनके सत्तारोहण के समय से ही खबरें उड़ रही थीं कि लालू के करीबी सांसद शहाबुद्दीन के लोगों ने कांग्रेस के 23 विधायकों की 'बाड़ाबंदी' कर रखी है। अखबार इस आशय की ...
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