नीति और नीयत से बन सकेंगे फिर सिरमौर
नई दिल्ली, जून 12 -- अनादि बरुआ, पूर्व राष्ट्रीय कोच, फुटबॉल बहुत पुरानी बात नहीं है। पिछले साल सितंबर में सीएएफए नेशंस कप फुटबॉल टूर्नामेंट में तीसरे और चौथे स्थान के लिए मैच हो रहा था। मुकाबला भारत और ओमान के बीच था। तमाम विश्लेषक यही मानकर चल रहे थे कि जीत ओमान की होगी, क्योंकि इससे पहले किसी भी अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में ओमान पर भारत भारी नहीं पड़ा था। इसका नतीजा 3-2 से भारत के पक्ष में रहा। दिलचस्प है, यह जीत पेनल्टी शूटआउट में मिली थी, जबकि इस मामले में ओमान का रिकॉर्ड हमसे बेहतर रहा है। जाहिर है, ऐसी सफलता यूं ही नहीं मिली। यह फुटबॉल की बेहतरी के लिए लगातार किए जा रहे कार्यों का नतीजा है। भारतीय फुटबॉल का इतिहास गौरवशाली रहा है। भारत की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने 1950 में ब्राजील में होने वाले फीफा विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया था, क्...
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