फतेहपुर, अगस्त 12 -- जहानाबाद। माटी की अस्मिता पर जब अंग्रेजों के चाबुक बरसे, तो नोनारा का धीरज आंसुओं में नहीं ज्वाला बनकर आंखों में उतर आया। एक तरफ हुकूमत की बेरहम गोलियां थीं, तो दूसरी तरफ अपने अधिकार और सम्मान की खातिर सीना ताने खड़े बेखौफ किसान। 26 फरवरी 1931 की वो खूनी सुबह सिर्फ लगान वसूली का दिन नहीं थी, बल्कि वो लम्हा था जब जुल्म की इंतहा ने किसानों के सब्र का बांध तोड़ दिया। शिवनारायण तिवारी का खून जैसे ही नोनारा की माटी में मिला, पूरा गांव एक दावानल बन गया...ऐसा आक्रोश जिसने ब्रिटिश सल्तनत के घमंड को पल भर में खाक में मिला दिया। हर साल यहां 26 फरवरी को बलिदान दिवस मनाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है। यह भी पढ़ें- जरा याद करो कुर्बानी: नगर कोतवाली में 13 अगस्त 1929 को बापू ने फहराया था तिरंगापिता ने गोली खाई तो पुत्र को मिली ...