मुंगेर, फरवरी 14 -- मुंगेर, एक संवाददाता। ध्यान के बिना योग नहीं और योग के बिना ध्यान नहीं, अर्थात निर्वाण मुक्ति के लिए ज्ञान और योग दोनों की आवश्यकता है। ध्यान के द्वारा इंद्रियों का दमन होता है, मन बहिर्मुखी से अंतर्मुखी होता है तो साधना में सफलता मिलती है। इसके लिए वेदांत में अष्टांग योग की चर्चा है। योग के आठ अंग हैं- यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। अष्टांग योग में ध्यान का स्थान सातवां है। समाधि के लिए कठोर ध्यानाभ्यास करने की आवश्यकता है। तब जाकर मन में शाश्वत शांति की प्राप्ति हो सकती है। इसलिए ध्यान के बिना शांति नहीं मिल सकती है। उक्त बातें महर्षि मेंहीं सत्संग आश्रम, बंगाली टोला, कल्याणपुर, मुंगेर में 8 फरवरी से चल रहे सप्त दिवसीय ध्यान साधना शिविर के छठे दिन के सत्संग में स्वामी शांतानंद जी महाराज ...
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