रिषिकेष, फरवरी 28 -- निर्वाण का अर्थ मृत्यु नहीं बल्कि ज्ञान की पूर्णता में विलीन होना है। मठ में गुरु के निर्वाण उत्सव (महाप्रयाण दिवस) पर धर्म सभा, भौतिक देह के विसर्जन और उनकी दिव्य चेतना (विदेह स्वरूप) के साथ एकाकार होने का महोत्सव है। यह बात सनातन धर्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने कहीं। वह आरती स्थल गंगा घाट स्वर्गाश्रम में स्वामी आत्मप्रकाश महाराज के 97 वें निर्वाणोत्सव में आयोजित धर्मसभा में मुख्य अतिथि के रूप में विचार व्यक्त कर रहे थे। उत्तर प्रदेश सरकार में दर्जा प्राप्त स्वामी रसिक महाराज ने कहा कि यह दिन गुरु की शिक्षाओं को पुनः स्मरण करने, कृतज्ञता व्यक्त करने और आत्म-साधना में दृढ़ता लाने का अवसर होता है। मौनी बाबा श्री गुरु चरण मिश्र ने संतों के बताए मार्ग पर चलने महत्व बताया। ...
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