चंदौली, अप्रैल 26 -- शहाबगंज, हिन्दुस्तान संवाद। जब-जब धरती पर अधर्म का बोलबाला होता है-तब भगवान का किसी न किसी रूप में अवतार होता है। जिससे असुरों का नाश होता है और अधर्म पर धर्म की विजय। भगवान चारों दिशाओं के कण-कण में विद्यमान है। इन्हें प्राप्त करने का मार्ग मात्र सच्चे मन की भक्ति ही है। त्रेता युग में जब असुरों की शक्ति बढ़ने लगी तो नाता कौशल्या की कोख से भगवान राम का जन्म हुआ। उक्त व्याख्यान मानस मर्मज्ञ परम पूज्य अतुल कृष्ण भारद्वाज ने मसोई गांव में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान कहीं।उन्होंने कहा कि भगवान सर्वत्र है. प्रेम से पुकारने व सच्चे मन से सुमिरन करने पर कहीं भी प्रकट हो सकते हैं। यह भी पढ़ें- सत्संग ही जीवन को परमात्मा से जोड़ने का सबसे सरल मार्ग इसलिए कहा गया है हरि व्यापक सर्वत्र समाना। आगे व्यास जी ने कहा निरगुण से सगुण ...