विधि संवाददाता, अप्रैल 21 -- UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में सजा काट रहे अपराधी रिजवान की जमानत और सजा के स्थगन की अर्जी को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति जयकृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अभियुक्त का आपराधिक इतिहास और अपराध की प्रकृति उसे राहत देने के योग्य नहीं बनाती है। अदालत ने अपने फैसले में 'डॉक्ट्रिन ऑफ ट्रांसफर ऑफ मैलिस' (दुर्भावना के हस्तांतरण का सिद्धांत) का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी एक की हत्या के इरादे से गोली चलाता है और वह गोली किसी दूसरे निर्दोष व्यक्ति को लग जाती है, तब भी वह हत्या के अपराध का ही दोषी माना जाएगा। यह मामला साल 2019 का है, जब संभल के बनियाढेर थाना क्षेत्र में रिजवान ने एक दुकानदार से पैसों की मांग की थी। द...
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