कन्नौज, जून 25 -- छिबरामऊ, संंवाददाता। निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने वर्ष भर के कठिनतम व्रत का संकल्प लेते हुए जल संरक्षण का संदेश दिया। श्रद्धालुओं ने प्रण किया कि वह जीवन में कभी जल का दुरुपयोग नहीं करेंगे, क्योंकि जल ही जीवन का आधार है। शक्तिपीठ गमा देवी के पुजारी पं.बनारसीदास शास्त्री ने बताया कि इस व्रत में सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक निर्जल रहकर भगवान विष्णु की आराधना की जाती है। यदि यह संभव न हो तो सूर्यास्त तक व्रत का पालन किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस दिन जलयुक्त घट, पादुका, वस्त्र और छाता आदि का दान करने का विशेष महत्व है तथा यह व्रत वर्ष भर की एकादशियों के समान फलदायी माना जाता है। यह भी पढ़ें- निर्जला एकादशी 2026: व्रत का पारण करने से पहले करें ये 3 काम, जानें शुभ समय, विधि शाम को माताजी और भगवान विष्...