हापुड़, जून 26 -- ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी के रूप में मनाया जाता है। गुरुवार को यह पर्व क्षेत्र भर में बड़े ही श्रद्धापुर्वक मनाया गया। महिलाओं ने व्रत रखे और ब्राह्मणों को भोजन कराया और उन्हें ऋतुफल और पानी पीने के लिए मटका दान दिया। वहीं गंगा नगरी समेत अलग अलग स्थानों पर लोगों ने मीठा शर्बत का वितरण किया। हिदू पंचांग के मुताबिक वर्ष में 24 एकादशियां पड़ती हैं, लेकिन निर्जला एकादशी का सबसे अधिक महत्व है। इसे पवित्र एकादशी माना जाता है। मान्यता के अनुसार इस एकादशी का व्रत रखने वालों को बिना पानी पीए ही व्रत रहना पड़ता है। इसलिए इसे निर्जला एकादशी कहते हैं। यह व्रत बेहद कठिन है, क्योंकि इसे रखने के नियम काफी सख्त हैं, जो इस व्रत को रखता है उसे न सिर्फ भोजन का त्याग करना पड़ता है, बल्कि पानी भी ग्रहण करने की मनाही ह...