लखनऊ, मार्च 12 -- लखनऊ, विशेष संवाददाता। प्रदेश में लगभग तीन करोड़ 72 लाख बिजली उपभोक्ताओं के अनुपात में नियमित भर्ती लंबे समय से लंबित है जबकि बिजली कंपनियों के खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। वर्ष 2025-26 के लिए जहां 8,990 करोड़ रुपये का परिचालन व अनुरक्षण खर्च अनुमोदित था, वहीं 2026-27 के लिए इसे बढ़ाकर 9,452 करोड़ रुपये प्रस्तावित किया गया है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि एक ओर बिजली कर्मियों का परिचालन व रखरखाव खर्च बढ़ रहा है और दूसरी ओर प्रदेश में संविदा कर्मियों की लगातार छंटनी हो रही है।नियामक आयोग ने इस मामले में पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक से तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। परिषद के अध्यक्ष ने कहा है कि संविदा कर्मियों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि ट्रांस...