रांची, जुलाई 7 -- रांची, संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त शिक्षकों के हक में एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि नियमित शिक्षक बनने से पहले की गई पारा शिक्षक (संविदा) की निर्बाध सेवा अवधि को भी पेंशन के लिए 'अर्हक सेवा' मानी जाएगी। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने शंभु राम और 43 अन्य सेवानिवृत्त शिक्षकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। राज्य सरकार को आठ सप्ताह के भीतर पेंशन, ग्रेच्युटी, जीपीएफ, जीआईएस, अवकाश नकदीकरण समेत सभी सेवानिवृत्ति लाभों की पुनर्गणना कर भुगतान करने का निर्देश दिया। अदालत ने सेवानिवृत्त की तिथि से भुगतान होने तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देने का भी आदेश दिया। अदालत ने सेवानिवृत्त की तिथि से भुगतान होने तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देने का भी आदेश दिया। याचिकाकर्ता...