नई दिल्ली, अगस्त 7 -- संयुक्त राष्ट्र की सतत विकास लक्ष्य रिपोर्ट- 2026 के अनुसार, दुनिया भर में सार्वजनिक अधिकारियों से संपर्क करने वाले लगभग 17 प्रतिशत लोगों ने बताया कि पिछले 12 महीनों के दौरान उनसे रिश्वत मांगी गई या सार्वजनिक सेवा प्राप्त करने के लिए उन्हें रिश्वत देनी पड़ी। रिपोर्ट के निष्कर्ष यह संकेत देते हैं कि निम्न-आय वाले देशों में रिश्वतखोरी का प्रभाव उच्च-आय वाले देशों की तुलना में अधिक है। भ्रष्टाचार केवल प्रशासनिक अनियमितता या आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, आर्थिक समानता और नागरिक अधिकारों से जुड़ी वैश्विक चुनौती है। जब किसी नागरिक को स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिस, भूमि, प्रमाण-पत्र, लाइसेंस या अन्य आवश्यक सरकारी सेवा के लिए वैध शुल्क के अतिरिक्त अवैध भुगतान करना पड़ता है, तो रिश्वत एक प्रकार के 'अदृश्य कर' में बदल जात...